क्या है राजस्थान के भूतिया गाँव कुलधरा का राज़!




क्या है राजस्थान के श्रापित गाँव कुलधरा का राज़!

19वीं शताब्दी के बाद से पूरी तरह से वीरान पड़ा, कुलधरा नाम का यह छोटा सा गांव राजस्थान के जैसलमेर से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। गाँव के सेकड़ो घर एवं सड़के वर्षो से धूल मे दबी किसी सदियो पुराने श्राप की और इशारा करती है| कुलधरा गाँव सदियो पुराने रहस्यों को कुछ इस तरह अपने अंदर दबाए बैठा है की जो भी उसे जानने की कोशिश मे वहाँ गया है, वो कभी कुलधरा को भुला नही पाया है|

1825 की उस काली रात मे अचानक सभी गाँव वाले, और साथ ही जुड़े हुए 83 गाँव के सभी रहवासी गायब हो गये, या कहें की वहाँ से चले गये, और उसके बाद आजतक उन्हे किसी ने नही देखा| 19 वी शताब्दी तक पूरा गाँव वीरान हो गया, बचे तो सिर्फ़ पीछे छूटे हुए खाली मकान और एक अंजान अभिशाप| तब से अभी तक उस गाँव से गायब हुए हज़ारो लोगो का आज तक कोई नामोनिशान नही मिला| इस तरह से बिना किसी निशान के इतने सारे लोगो का गायब हो जाना इतिहासकारो के लिए एक पहेली बना हुआ है| आज भारतीय पुरातत्व विभाग इस गाँव की देखभाल एतिहासिक विरासत के रूप मे करता है|

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क्या है कहानी कुलधरा के श्राप की?




कुलधरा की इस भुतिया कथा से जुड़ा है प्रेम, प्रेम जैसलमेर के पूर्व प्रधान मंत्री सलीम सिंह का, जिनका मन गाँव के प्रमुख की बेटी पर आ गया था| कहा जाता है की सलीम सिंह ने पूरे गाँव पर और परिवार पर अत्याधिक कर लागू करके अपनी माँग पूरी करने की ज़बरदस्ती की थी| बहुत ही ज़्यादा उँचे करो के विरोध हेतुऔर अपने गाँव की बेटी के सम्मान की रक्षा के लिए सभी 83 गाँव के लोगो ने अपने गाँवो को त्याग देने का निर्णय लिया| और देखते ही देखते सभी गाँव वालो ने अपने खाली घरो को पीछे छोड़ दिया|

गांव छोड़ने से पहले, उन्होंने एक श्राप दिया, कि आज के बाद कोई भी इस गांव में कभी नहीं रह सकेगा, और उसी श्राप ने कुलधरा गाँव का विनाश किया और सदियो के लिए उसे वीरान कर दिया| ऐसा कहा जाता है कि जो भी इस भूमि पर बसने की कोशिश करता है वह असामान्य गतिविधियों का अनुभव करता है और जल्द ही छोड़ देता है। श्राप का असर आज भी देखा जा सकता है, गाँव आज भी वीरान है| गाँव के लोगों द्वारा पीछे छोड़े गए ईंट के घर, कुएं और मंदिर पूरी तरह से वीरान है और धूल की चादर ओढ़े हुए है|

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क्या अभी भी श्रापित है कुलधरा गाँव?

भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा एहासिक स्थल का दर्जा प्राप्त करने के बाद, कुलधरा अब एक पर्यटक स्थल के रूप मे प्रसीध है, परंतु हर दिन के साथ इसकी स्थिति गिरने लगी है। जैसे ही सूर्य ढलने लगता है, कुलधरा के द्वार पड़ोसी गाँव वालो के द्वारा बंद कर दिए जाते है, क्योंकि माना जाता है की सूरज ढालने के बाद कुलधरा मे अलौकिक या असाधारण शक्तियो का वास होता है| असाधारण गतिविधियो की पुष्टि खुद नई दिल्ली की असाधारण सोसाइटी ने कुछ तथ्यो के आधार पर की है, जैसे की घबराहट वाली आवाज़ें, मिट्टी पर पैरों के निशान, इंसानी छाया का चलना, कारों पर खरोंच और ऐसी ही बहुत सी भयानक गतिविधियाँ|

हालांकि, इसकी प्राचीन संरचनाएं, रहस्यमयी एवं डरावनी घटनाएं, और दुखद कहानी पर्यटकों को आकर्षित करती रही है| राजस्थान सरकार काफ़ी लंबे समय से इस गाँव को नया रूप देकर यहा फिर से जीवन लाने की कोशिश मे है, परंतु श्राप के चलते आज तक यह संभव नही हो सका|




Categories: Mysteries

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