जतिंगा! भारत का एक गाँव जहा सेकड़ो पक्षी हर रात करते है आत्महत्या!




जतिंगा! भारत का एक एसा गाँव जहा सेकड़ो पक्षी हर रात करते है आत्महत्या!

अजीबो-ग़रीब प्रक्रतिक घटनाओ पर चाहे जितनी कहानियाँ लिख ली जाए, या चाहे जीतने शोध कर लिए जाएँ, सच्चाई हमेशा हमारी कल्पना से काफ़ी ज़्यादा पेचीदा होती है| हमारी दुनिया रहस्यों से भरी हुई है, हर कोने मे कोई ना कोई रहस्य छुपा है| ऐसा एक अनोखा रहस्य असम के एक छोटे से गांव में भी देखने को मिलता है| जतिंगा पहाड़ों के बीच स्थित एक बेहद सुंदर गाँव है, इसे मौत की घाटी के रूप में भी जाना जाता है, और इसकी वजह है गाँव मे हो रही एक अजीबो ग़रीब घटना|

क्या होता है जतिंगा गाँव मे हर रात?

मानसून की रात में, अंधेरे चाँद की घात में, जैसे-जैसे गाँव मे धुंध का परदा उतरता है, सैकड़ो पंछी गाँव की घाटी की तरफ़ उड़े चले आते है, और पेड़ो, मकानो, और खंबो से टकरा कर आत्महत्या कर लेते है| अगली सुबह के साथ इंतज़ार कर रहा होता है एक भयावह नज़ारा, सेकड़ो मृत पक्षी जतिंगा गाँव की सड़को पर और घरो की छतो पर पिछली रात की तस्वीर बयाँ कर रहे होते है| यह अजीब घटना मानसून की धुंधली रातो मे केवल शाम की ७ बजे से १० बजे के बीच ही होती है|




लंबे समय से जतिंगा गाँव वाले यह मानते आ रहे है की आसमान मे घूमती दुष्ट आत्माए पक्षियो की आत्महत्या के लिए ज़िम्मेदार है| आश्चर्यजनक रूप से यह देखा गया है कि पक्षी केवल जतिंगा घाटी के एक 1.5किमी लंबे हिस्से की तरफ ही आकर्षित होते है, ना की पूरी घाटी की और|

दिलचस्प बात यह है कि यह न केवल स्थानीय पक्षी हैं जो सामूहिक आत्महत्या में भाग लेते हैं, जबकि कई प्रवासी प्रजातियां भी सुबह में मृत पाई गयी हैं। अब तक इस घटना का शिकार कुल 44 दर्ज प्रजातियाँ हुई है| किंगफिशर, ब्लैक ड्रॉन्गो, ब्लैक कटर, बाघ कटर, हरी कबूतर, पहाड़ी पट्रिज, तालाब हेरॉन जैसी पक्षी प्रजातियां इससे प्रभावित हुई हैं।

माना जाता है कि पक्षियों को घाटी के पास से उड़ते समय काफ़ी सारी परेशानियाँ होती है, जिससे उनकी मौत हो जाती है। माना जाता है की वे  ग्रामीणों द्वारा लगाए गए प्रकाश स्रोतों की तरफ रहस्यमयी तरीके से आकर्षित होते है| सबसे बड़ी पहेली ये है की इनमे से ज़्यादातर पक्षी प्रजातियाँ दैनिक है, उनके रात मे उड़ने का या सफ़र करने का कोई कारण समझ नही आता|

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पक्षियो की आत्महत्या के पीछे जुड़े रहस्य:

इस सामूहिक आत्महत्या ने वैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों को समान रूप से परेशान किया है, लेकिन कोई भी इस रहस्य को समझाने में सक्षम नहीं है। कई अध्ययन किए गए हैं, और इन अजीब सिद्धांतों को समझने के लिए विभिन्न तरह की जाँचे भी की गयी, लेकिन अभी तक कुछ भी ठोस नहीं पता चल सका है। ऑर्निथोलॉजिस्ट, जिन्होंने पक्षियों के इस अजीब व्यवहार का अध्ययन किया, उन्होने देखा कि लंबी दूरी के प्रवासी पक्षी इस सामूहिक आत्महत्या के शिकार नहीं हुए है| मानसून के दौरान जब असम के कई जल निकायों में बाढ़ आ जाती है, कई पक्षी प्रजातियों को एक बेहतर आवास ढूँढने के लिए मजबूर होना पढ़ता है, मानसून के दौरान जातींगा पर उड़ान भरने मे पक्षियो को जो तेज़ हवाओ और कोहरे का सामना करना पढ़ता है, वह उनके लिए काफ़ी परेशानियाँ खड़ी कर देता है|

यह अभी भी नहीं समझा जा सका है कि क्यों पक्षी घाटी के केवल 1.5 मीटर लंबी पट्टी की तरफ ही आकर्षित होते है। यह भी समझ मे नहीं आता है कि ये पक्षी केवल एक निश्चित समय पर क्यों वहाँ से गुज़रते है, जब इनमें से अधिकतर प्रजातियां दैनिक हैं, यानी वे दिन के दौरान सक्रिय होते हैं और रात में सोते हैं।

एक और सिद्धांत है जिससे इस घटना को जोड़ा जा सकता है, हो सकता है की यह सारा खेल पृथ्वी के चुंबकत्व का हो| सुझाव यह है की मानसून मे भूमिगत जलस्तर मे परिवर्तन से यहा के चुंबकत्व मे भी परिवर्तन आत है, हो सकता है की इसके चलते यह सारे पक्षी विचलित हो जाते हों| यह अभी भी सही तरीके से प्रमाणित नही हो पाया है, की क्यूँ दैनिक प्रजाति के पक्षी धुंधली रातो मे हिसंक तरीके से इस घाटी की और आकर्षित हो अपनी जान दे देते है|

अध्ययन और शोध के बावजूद इस भयावह घटना को अभी तक समझा नहीं जा सका है| कहा नही जा सकता की यह आसमान मे घूमती बुरी आत्माओ की वजह से है, या कठिन जलवायु की वजह से, परंतु हर मानसून की रात सैकड़ो पक्षियो का आत्महत्या का दौर जारी है|




Categories: Mysteries

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