क्या है “नमस्कार” के पीछे छुपा वैज्ञानिक रहस्य?




नमस्कार, एक ऐसा शब्द जो अपने आप मे अनगिनत प्रथाओ, आध्यात्मिक अर्थों, और वैज्ञानिक लाभो का भंडार है| नमस्कार या नमस्ते वैदिक काल से ही भारतीय मूल में अभिवादन का तरीका है, और इसका जन्म भारतीय उपमहाद्वीप से या विशेष रूप से हिंदू धर्म से हुआ है। आज के युग मे जब योग एक स्वस्थ जीवन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास बन रहा है एवं हर एक इंसान दूसरे क्षेत्र की प्रथाओ से परिचित है, ऐसे मे हम में से हर कोई नमस्ते शब्द से वाक़िफ़ है। लेकिन, क्या हम नमस्ते के पीछे छिपे हुए विज्ञान या नमस्कार के पीछे के वास्तविक अर्थ को जानते हैं?

क्या हैनमस्कारके पीछे छुपा विज्ञान?

इस की मुद्रा को “अंजली मुद्रा” या “प्राणामासन” के नाम से भी जाना जाता है| नमस्कार करते समय, करने वाले का सिर तोड़ा झुका होता है, हाथ कुछ इस प्रकार झोड़े जाते है जिस से की दोनो हथेलिया एक दूसरे से लग कर एक दूसरे पर दबाव डाले, अंगूठा छाती के करीब रहता है अथवा चारों उंगलिया उपर की दिशा की तरफ इशारा करती हैं। इसे “नमस्कार” शब्द कहकर या केवल शारीरिक रूप से प्रदर्शन करके भी किया जा सकता है।

नमस्कार करने के दौरान, हथेलियो पर पढ़ने वाले दबाव से हमारी हथेलियो मे मौजूद अक्कुप्रेसूरे पायंट्स पर भी दबाव पढ़ता है| हम सभी जानते हैं कि अक्कुप्रेसूरे पायंट्स को मालिश करने से विभिन्न स्वास्थ्य लाभ होते हैं। यह आपको चिंता, तनाव, अनिद्रा, अवसाद, और यहां तक ​​कि दिल की समस्याओं में भी मदद करता है। हथेलियों में कुछ अक्कुप्रेसूरे पायंट्स हैं जो आपको शारीरिक दर्द जैसे सिरदर्द, गर्दन में दर्द, पेट दर्द, माइग्रेन इत्यादि में भी मदद करते हैं। यह आपकी श्वास की समस्या में सुधार लाने में भी मदद करता है।




यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि नमस्कार आपके स्वास्थ्य और दिमाग को विभिन्न तरीकों से लाभान्वित करता है।

नमस्कार का आध्यात्मिक अर्थ: –

नमस्कार का आध्यात्मिक अर्थ है “मैं आप में मौजूद दिव्य शक्ति को झुक कर प्रणाम करता हूं”। यह एक लाखों साल पुराना अभ्यास है, कहा जाता है कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार देवताओं और भगवानो के द्वारा भी नमस्कार का उपयोग एक दूसरे के अभिवादन के तौर पर किया जाता था| ऐसे विभिन्न आध्यात्मिक कारण है जिनके अनुसार नमस्कार हमारे अंदर प्रकाश की पूर्ति करता है|

ऐसा माना जाता है कि हिंदू धर्म में प्रथाएं मुख्य रूप से आपकी आत्मा की तृप्ति के लिए होती है| जिस वक्त आप किसी व्यक्ति को नमस्कार करते है, तब आप उनकी आत्मा को स्वीकार कर रहे होते है, और एक दूसरे के अंदर जो दिव्य शक्ति है उसका सम्मान कर रहे होते हैं।

हिंदू धर्म का कहना है कि हर इंसान के भीतर एक ईश्वर है। नमस्कार का एक अर्थ है “मैं तुम्हारे भीतर के भगवान को नमन करता हूं” या “मेरे भीतर मौजूद आत्मा आपके भीतर की आत्मा को नमन करती है”।

देवीय संसार से जुड़ाव: – 

जब दूसरा व्यक्ति आपके नमस्कार को स्वीकार कर आपको भी नमस्कार करता है, तब दोनो आत्माओं दोनों के बीच एक आध्यात्मिक संबंध विकसित होता है| आकारहीन रूपों के बीच का ये मजबूत संबंध दोनो के भीतर एक सकारात्मक आभा बनाता है।

नमस्कार या नमस्ते शब्द संस्कृत शब्द “नमः” से उत्पन्न हुआ है| न्याय के विज्ञान में इस शब्द को “एक भौतिक क्रिया के रूप में विस्तारित किया गया है, यह व्यक्त करता है कि आप सभी गुणों में और हर तरह से मुझसे बेहतर हैं”। यह हमारे भीतर अहंकार को खत्म कर आत्मसमर्पण के एक दृष्टिकोण को जन्म देता है, यह हमारे भीतर एक आत्म ज्ञान को जन्म देता है कि हम इस ब्रह्मांड के एक अंश बराबर भी नहीं हैं|

यह दिव्य चेतना प्राप्त करने का एक तरीका माना जाता है। जैसा कि हिंदू धर्म में बताया गया है कि आपका जीवित शरीर 5 तत्वों से बना है, अर्थात अग्नि (अग्नि), प्रथविट्टत्व (पृथ्वी), पवन (वायु), जल (जल), और अस्तास्तत्व (वैक्यूम)।

जब आप नमस्कार की मुद्रा मे होते है तब आप सीधे ब्रह्मांड के वैक्यूम तत्व से जुड़े होते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जब ब्रह्मांड नष्ट हो जाएगा तब भी प्रकृति में वैक्यूम तत्व विकृत नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार, आप तत्व के माध्यम से अपनी आत्मा में दिव्य चेतना को अवशोषित करते हैं। जब आप नमस्कार शब्द कहते हैं, तो आप ब्रह्मांड के पृथ्वी तत्व से जुड़ते हैं, और जैसे ही दोनों तत्व एक दूसरे से मिलते हैं, अन्य सभी तत्व एक साथ आते हैं और आपकी आत्मा से जुड़ते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप ब्रह्मांड के माध्यम से आपकी आत्मा मे आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

यह करने का एक और लाभ यह है की इसके कारण आपकी सभी इंद्रियां सक्रिय हो जाती है, और आपका दिमाग केंद्रित रहता है, जिससे की आप लंबे समय तक सामने वाले व्यक्ति को याद रख सकते है|

अंत मे:

नमस्कार करने की क्रिया भले ही हिंदू धर्म से पैदा हुई हो, और केवल संबंधित क्षेत्रो में ही इसका प्रयोग किया जाता हो| परंतु इस से जुड़े लाभो को किसी धर्म से नही बाँधा जा सकता| योग या सूर्य नमस्कार के समान, नमस्कार भी हर व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है| इससे चाहे तो आध्यात्मिक लाभो के लिए ना सही परंतु वैज्ञानिक लाभो के लिए प्रयोग मे लाया जा सकता है|

जब आप किसी व्यक्ति से हाथ मिलते हैं, तो शरीर के बीच नकारात्मक ऊर्जा या सकारात्मक ऊर्जा बहने की समान संभावना होती है, जिसे की हम आधुनिक दुनिया में विश्वास और वाइब्स जैसे शब्दों द्वारा भी संदर्भित करते है| जब आप नमस्कार करते हैं तब किसी तरह का कोई शारीरिक स्पर्श ना होने से केवल सकारात्मक उर्जा का ही प्रवाह होता है|

यह हमें अहंकार और नकारात्मकता से दूर मानवता की जड़ों से जोड़ता|




Categories: Spiritual

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